खेल के मैदान छिन रहे हैं बच्चों से! – डॉ. वर्णिका शर्मा की सख़्त चेतावनी

  • अतिक्रमण हटाकर सुरक्षित खेल स्थल उपलब्ध कराने की माँग – बच्चों के भविष्य पर खतरा

दिनेश यदु @ रायपुर। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश के शहरों में बच्चों के खेल मैदानों के घटते जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को पत्र क्रमांक 730, अनुशंसा क्रमांक आर-183, 9 सितम्बर 2025 जारी कर बच्चों के लिए खुले और सुरक्षित खेल मैदान उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

खुले मैदानों पर अतिक्रमण – बच्चों का खेल सीमित

डॉ. शर्मा ने कहा कि शहरों में मैदानों का उपयोग चाट-पकौड़ी जैसे व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे बच्चों के खेलने के अवसर कम हो रहे हैं। साथ ही मोबाइल फोन की लत बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए खुले मैदान अनिवार्य हैं।

डॉ. शर्मा की मुख्य अनुशंसाएँ – तुरंत अमल की आवश्यकता

विद्यालय से जुड़े खेल मैदानों पर किसी भी व्यवसायिक गतिविधि को रोकना अनिवार्य हो।

  • खेल मैदानों को बच्चों के लिए आरक्षित और सुरक्षित घोषित किया जाए।
  • उपलब्ध सरकारी निधियों का उपयोग खेल सुविधाओं के विस्तार में किया जाए।
  • बहुआयामी खेल सुविधाएँ विकसित कर प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर दिए जाएँ।
  • हर एक किलोमीटर पर बच्चों के लिए खेल मैदान और इनडोर खेल परिसर की योजना बने।
  • नए आवासीय प्रोजेक्ट में खेल मैदान और खेल सुविधाओं को अनिवार्य किया जाए।
  • अतिक्रमण हटाकर बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित मैदान उपलब्ध कराए जाएँ। “बच्चों का भविष्य खेल में है” – डॉ. शर्मा का संदेश

डॉ. शर्मा ने अधिकारियों से इन अनुशंसाओं पर तत्काल कार्यवाही कर आयोग को रिपोर्ट देने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेल बच्चों के स्वास्थ्य, मानसिक विकास और सामाजिक सहभागिता के लिए आवश्यक हैं। मोबाइल पर निर्भरता कम कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का यह महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही खेल प्रतिभाओं को निखारने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

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