उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पहली बार दिखा यूरेशियन ऊदबिलाव

  • उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप से हुई पुष्टि, विशेषज्ञ बोले- ये पर्यावरण की सेहत का अच्छा संकेत

दिनेश यदु @ Raipur : छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पहली बार यूरेशियन ऊदबिलाव (Eurasian Otter) की मौजूदगी कैमरा ट्रैप के जरिए दर्ज की गई है। यह दुर्लभ प्रजाति राज्य में पहले कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी गई थी।विशेषज्ञों का मानना है कि यह छत्तीसगढ़ के जल व वन संसाधनों की गुणवत्ता और जैव विविधता की समृद्धि का पुख्ता सबूत है।


इस महत्वपूर्ण खोज को छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के सहयोग से संचालित ऊदबिलाव अध्ययन परियोजना के तहत अंजाम दिया गया। पिछले तीन वर्षों से इस परियोजना के तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में ऊदबिलाव की मौजूदगी की निगरानी की जा रही है। पहले मरवाही और कोरबा में कुछ संकेत मिले थे, लेकिन यह पहली बार है जब किसी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में यूरेशियन ऊदबिलाव की प्रत्यक्ष रिकॉर्डिंग हुई है।

कैसे हुई ऊदबिलाव की पहचान?

टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप लगाए गए थे, जिनके जरिए वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है। इन्हीं कैमरों में एक दुर्लभ ऊदबिलाव की तस्वीर कैद हुई। इस पुष्टि के बाद वन विभाग और शोधकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऊदबिलाव जल आधारित पारिस्थितिकीय तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक होता है। इसकी उपस्थिति बताती है कि यहां का पर्यावरण शुद्ध और संतुलित है।

किन लोगों ने निभाई मुख्य भूमिका?

यह शोध कार्य मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुधीर अग्रवाल की अनुमति एवं पीसीसीएफ (विकास/योजना)  अरुण पांडेय और जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव राजेश चंदेले के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के निदेशक  वरुण जैन और एसीएफ जगदीश दर्रो के नेतृत्व में कैमरा ट्रैप लगाए गए।

शोध टीम में प्राणी वैज्ञानिक निधि सिंह, वनस्पति वैज्ञानिक दिनेश कुमार, जनविज्ञानी विश्वास मेश्राम, पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. वाय.के. सोना, पक्षी विज्ञानी सर्वज्ञा सिंह, प्राचार्य फ्रैंक आगस्टिन नंद और सुमित सिंह शामिल रहे।

वन मंत्री की अहम भूमिका

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस परियोजना को प्राथमिकता दी और सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की। उनका मार्गदर्शन और समर्थन इस सफलता के पीछे महत्वपूर्ण रहा।

क्या है ऊदबिलाव की अहमियत?

यूरेशियन ऊदबिलाव जल स्रोतों के आसपास रहने वाला एक शर्मीला और दुर्लभ प्राणी है। यह प्रजाति पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। इनका रहना इस बात का संकेत है कि उस क्षेत्र में जल प्रदूषण कम है और प्राकृतिक संसाधन स्वस्थ हैं।

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