ओडिशा वन विभाग ने देखा छत्तीसगढ़ का संजीवनी मॉडल

– ओडिशा वन विभाग की टीम ने रायपुर में संजीवनी और मार्ट का दौरा किया – वन उत्पादों के कारोबार को लेकर हुई जानकारी साझा

दिनेश यदु @ Raipur : छत्तीसगढ़ के वन उत्पादों की गुणवत्ता और उनके व्यापारिक मॉडल को समझने के लिए आज ओडिशा वन विभाग की एक विशेष टीम ने राजधानी रायपुर का दौरा किया। टीम ने यहां संजीवनी और मार्ट केंद्रों का निरीक्षण किया और स्थानीय वन उत्पादों की बिक्री, प्रबंधन और विपणन प्रक्रिया को नजदीक से जाना।

क्या है संजीवनी और मार्ट?

रायपुर में संचालित संजीवनी केंद्र और मार्ट छत्तीसगढ़ शासन की महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय वनवासियों द्वारा संग्रहित वन उत्पादों को बाजार में उचित मूल्य दिलाया जाता है। यहां हर्बल उत्पाद, महुआ, शहद, लाख, चिरौंजी, इमली जैसे दर्जनों प्राकृतिक उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ बिक्री के लिए रखा जाता है।

ओडिशा टीम ने ली पूरी जानकारी

ओडिशा वन विभाग की टीम ने इन केंद्रों की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण प्रक्रिया, पैकेजिंग तकनीक और लाभ वितरण प्रणाली को बारीकी से समझा। उन्होंने यह भी देखा कि कैसे छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों और वन समितियों के माध्यम से वन उत्पादों को जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर काम किया जा रहा है।
टीम ने उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग, मार्केटिंग रणनीति और ग्राहक प्रतिक्रिया के बारे में भी सवाल किए और इन मॉडलों को ओडिशा में लागू करने की रुचि दिखाई।

वन आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

संजीवनी केंद्र के प्रतिनिधियों ने बताया कि कैसे यह मॉडल आदिवासी समुदायों को रोजगार देने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाज़ार से जोड़ने का काम कर रहा है।

दोनों राज्यों के बीच सहयोग की संभावना

यह दौरा केवल एक निरीक्षण नहीं था, बल्कि यह दोनों राज्यों के बीच वन आधारित अर्थव्यवस्था में सहयोग का संकेत भी है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अनुभव से ओडिशा भी अपने वन उत्पादों को सशक्त बनाने के लिए नए कदम उठा सकता है।

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