“एकल माताओं को मिला सम्मान, बना प्रेरणा का मंच”

“माँ की ममता को मिला मंच: रायपुर में एकल माताओं का हुआ सम्मान, संघर्ष को बताया गया असली शक्ति”

दिनेश यदु @ Raipur : माँ सिर्फ जन्म नहीं देती, वो अपने बच्चों का भविष्य भी गढ़ती है – और जब कोई माँ यह सब अकेले करती है, तो वह एक मिसाल बन जाती है। मातृ दिवस के मौके पर सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में प्रत्युषा फाउंडेशन द्वारा आयोजित “एकल माँ प्रसूति सम्मान समारोह” में कुछ ऐसी ही मजबूत और प्रेरणादायक माताओं का सम्मान किया गया, जिन्होंने अकेलेपन को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया।

भावनाओं से भरा मंच, तालियों से गूंजा सभागार

कार्यक्रम के दौरान जब इन एकल माताओं ने अपनी-अपनी जीवन की कहानी सुनाई, तो वहाँ मौजूद लोग भावुक हो उठे। कई लोगों की आँखों में आँसू थे, लेकिन उनके साहस और जज्बे पर तालियाँ भी जमकर बजीं।
21 साल की पुष्पा, जो रेलवे में काम करती हैं, आज अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रही हैं। मोती दुबे ने पति को गर्भावस्था में खो दिया था, लेकिन आज उनका बेटा इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता है। 72 साल की सुमित्रा देवी ने चार पीढ़ियों को अकेले पाला है। वहीं शांति देवी के बेटे आज एक शैक्षणिक संस्था के संचालक हैं।

सिर्फ नाम नहीं, समाज के लिए मिसाल बनीं ये माताएँ

मंच पर कई और माताएँ भी मौजूद थीं, जिनके संघर्ष और योगदान को सलाम किया गया। इनमें अर्चना तिवारी, मधु अरोड़ा, अन्नपूर्णा शर्मा, गौरी अवधिया, नीला बघेल, पिंकी स्वामी, सुनीता शर्मा, कनकलता मिश्रा (बेमेतरा), शैफाली मंडल (माना), विद्या भट्ट सहित 24 माताओं को सम्मानित किया गया।

समाज के बड़े चेहरों की मौजूदगी

इस खास आयोजन में मुख्य अतिथि के तौर पर भाजपा प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, पार्षद राजेश गुप्ता और पार्षद सुमन पांडे शामिल हुए।
कार्यक्रम का संयोजन शशिकांत शर्मा ने किया, संचालन दिव्यांशी सुरेश मिश्रा ने संभाला और आभा मिश्रा ने संरक्षक की भूमिका निभाई।

संस्था की मजबूत टीम

कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्युषा फाउंडेशन की पूरी टीम ने मेहनत की। अध्यक्ष प्रीति दास मिश्रा, सचिव प्रवीण शुक्ला, कोषाध्यक्ष प्रेम प्रकाश साहू, मीडिया प्रभारी ऋतु प्रजापति सहित अन्य सदस्यों – आयुष मिश्रा, वाय के जया, त्रिभुवन दास मिश्रा, अंजलि देशपांडे और पुष्पा साहू का योगदान सराहनीय रहा।

सिर्फ एक दिन का नहीं, भविष्य का संकल्प

इस आयोजन के साथ फाउंडेशन ने यह भी घोषणा की कि आगे वे एकल माताओं के लिए स्थायी सहायता समूह बनाएंगे, जिसमें उन्हें आर्थिक सहयोग, कानूनी मदद, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ और कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पहल एक सामाजिक आंदोलन की तरह आगे बढ़ेगी।

नारी शक्ति को मिला सम्मान

यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि यह समाज को यह संदेश देने वाला मंच था कि एकल माँ किसी से कम नहीं होती। वह अपने बच्चों के लिए दीवार बनती है, तो ज़रूरत पड़ने पर पुल भी। यह आयोजन बताता है कि अगर साथ मिले, तो अकेली माँ भी समाज में बदलाव ला सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *