- नवा रायपुर जंगल सफारी में विदेशी प्राणियों की एंट्री पर सवाल: नर जेब्रा की असमय मौत से उठे गंभीर मुद्दे
दिनेश यदु @ Raipur : नवा रायपुर जंगल सफारी में हाल ही में विदेशी और दुर्लभ प्राणियों की एंट्री ने पर्यटकों के बीच उत्साह बढ़ाया था। गुजरात के रिलायंस जू से मीरकैट, माउस डियर और जेब्रा जैसे विदेशी प्राणी यहां लाए गए थे। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ के मरवाही व चिरमिरी के जंगलों से मिले दुर्लभ सफेद भालू के शावक का एक हिस्सा गुजरात भेजा गया, जो वन्यजीव संरक्षण में सहयोग का अनूठा उदाहरण था। लेकिन इन खुशखबरी के बीच, अप्रैल में लाए गए नर जेब्रा की अचानक मौत ने वन विभाग की तैयारियों और प्राणी संरक्षण की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नर जेब्रा की मौत: क्या थी वजह?
अप्रैल में क्वारंटीन के लिए लाए गए नर जेब्रा की मौत ने वन विभाग के प्रबंधन पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। क्वारंटीन की अवधि पूरी होने से पहले ही इस विदेशी प्राणी का असमय निधन हो गया, जिससे वन विभाग ने जांच की बात कही है। वन विभाग का दावा है कि मौत की असल वजह सामने आने के बाद ही भविष्य के लिए बेहतर कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, जानकारों और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्राणी के नए पर्यावरण और आहार के प्रति अनुकूलन प्रक्रिया में कम ध्यान दिया गया। साथ ही, नवा रायपुर में बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था और विशेषज्ञों की मौजूदगी की भी कमी उजागर हुई है।
पहले भी वन विभाग के लिए चिंता का विषय रहा हिमालयन भालू का निधन
इससे पहले, तीन माह पूर्व भी एक गंभीर मामला सामने आया था, जब धीमापुर (नगालैंड) से नवा रायपुर जंगल सफारी के लिए लाए जा रहे हिमालयन भालू की गर्मी से मौत हो गई थी। नर-मादा जोड़ी बर्फ की सिल्ली में लायी जा रही थी, लेकिन पं. बंगाल के चेक पोस्ट पर बार-बार जांच के कारण सफर 200 किलोमीटर का 16 घंटे में पूरा हुआ और बर्फ पिघल गई। इस कारण नर भालू बुरी तरह बीमार हो गया और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना ने वन विभाग की अंतर्देशीय प्राणियों के परिवहन नीति और प्रक्रिया की दक्षता पर सवाल उठाए थे।

विदेशी प्राणियों की नई एंट्री: एक उत्साह और चुनौती दोनों
गुजरात से लाए गए मीरकैट, माउस डियर और जेब्रा जैसे विदेशी प्राणी नवा रायपुर जंगल सफारी में पर्यटकों के लिए नई विविधता लेकर आए हैं। ये प्राणी जंगल सफारी के अनुभव को और भी रोमांचक और विविध बनाने का काम करते हैं। मीरकैट और माउस डियर छोटे, चतुर और अनोखे प्राणी हैं जो प्राकृतिक जीवन के करीब महसूस कराते हैं। लेकिन इनके साथ आने वाली देखभाल की चुनौतियां और वन विभाग की क्षमता पर भी अब सवाल खड़े हो गए हैं।

सफेद भालू की अनोखी कहानी और वन संरक्षण में सहयोग
छत्तीसगढ़ के मरवाही और चिरमिरी के जंगलों से मिली सफेद भालुओं की कहानी वन संरक्षण के लिए एक प्रेरणा है। जब इनके माता-पिता खो गए थे, वन विभाग ने इन्हें बचाया और पूरी देखभाल की। एक शावक को गुजरात भेजा गया, जो राज्य-राज्य वन्यजीव संरक्षण सहयोग का उज्जवल उदाहरण है। यह आदान-प्रदान वन संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो राज्यों के बीच साझा जिम्मेदारी और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देता है।
वन विभाग की सख्त तैयारी और विशेषज्ञ सहयोग
नर जेब्रा की मौत और हिमालयन भालू के निधन जैसे घटनाक्रम के बाद वन विभाग ने विदेशी और स्थानीय प्राणियों की स्वास्थ्य जांच और देखभाल के नियमों को और सख्त करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों की सलाह लेकर प्राणियों के लिए बेहतर क्वारंटीन व्यवस्था, आहार, चिकित्सकीय सुविधा और पर्यावरणीय अनुकूलन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। वन विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में जंगल सफारी में लाए जाने वाले सभी प्राणियों के लिए उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकता बने।सम्मान को प्राथमिकता दी जाए।
