- वन मंत्री केदार कश्यप ने समझाया ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ का महत्व, प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्टाचार में कमी आएग
- मोदी सरकार की दूरदर्शिता से संभव होगा चुनावों का समन्वय, समय और संसाधनों की बचत
दिनेश यदु @ Raipur : जगदलपुर में वन मंत्री केदार कश्यप ने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के विषय पर आयोजित एक सामाजिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बताया कि यह योजना केवल भाजपा की रणनीति नहीं, बल्कि देश के वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए बताया कि इससे देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, चुनावी प्रक्रिया में सुधार आएगा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण होगा। उन्होंने आम जनता से इस पहल को जन आंदोलन बनाने की अपील की।

एक राष्ट्र एक चुनाव: इतिहास और वर्तमान जरूरत
केदार कश्यप ने बताया कि भारत में पहली बार 1951-52 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। यह परंपरा 1967 तक चली, लेकिन बाद में अलग-अलग चुनावों का सिलसिला शुरू हो गया। बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं और विकास में बाधा आती है। इसी समस्या को देखते हुए सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की, जिसने सभी राजनीतिक दलों, न्यायविदों और आम जनता से विचार मांगे। इस प्रक्रिया से स्पष्ट हुआ कि चुनावों को एक साथ कराने से देश की राजनीति और प्रशासनिक कामकाज दोनों में सुधार होगा।
मोदी सरकार का दूरदर्शी विजन
वनमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना को लेकर जो सोच प्रस्तुत की है, उसका मकसद चुनावों को सुव्यवस्थित करना और बार-बार चुनावों की वजह से होने वाली ऊर्जा, समय और धन की बर्बादी को कम करना है। अगर लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा चुनाव हर पांच साल में एक साथ होंगे, तो देश को फायदा होगा और राजनीतिक स्थिरता बढ़ेगी। इससे शासन सुचारू रूप से चल सकेगा और देश की विकास दर में सुधार आएगा।

प्रशासनिक सुस्ती और आदर्श आचार संहिता की चुनौती
केदार कश्यप ने बताया कि चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के कारण नीतिगत फैसलों में देरी होती है। यह न केवल विकास कार्यों को प्रभावित करता है, बल्कि प्रशासन को भी धीमा कर देता है। बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी चुनावी मोड में उलझी रहती है, जिससे देश के विकास कार्य प्रभावित होते हैं। एक राष्ट्र एक चुनाव से इस समस्या का समाधान होगा और प्रशासन पूरी तरह से विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा।
राजनीतिक भ्रष्टाचार पर लगेगा नियंत्रण
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि बार-बार चुनाव कराने से राजनीतिक भ्रष्टाचार बढ़ता है क्योंकि हर चुनाव के लिए भारी धनराशि जुटानी पड़ती है। इससे राजनीतिक दलों पर और आम जनता पर भी चुनावी चंदा देने का दबाव बढ़ता है। एक साथ चुनाव कराने से चुनाव खर्च में कमी आएगी, जिससे भ्रष्टाचार कम होगा और जनता पर आर्थिक बोझ भी घटेगा। मोदी सरकार इस पहल के माध्यम से भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी और बेहतर शासन व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रही है।

जनसहभागिता से बनेगा जन आंदोलन
केदार कश्यप ने रायपुर की जनता से अपील की कि वे इस मुद्दे पर ज्यादा से ज्यादा चर्चा करें। जब आम लोग इस योजना को समझेंगे और समर्थन देंगे, तभी यह ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ का प्रस्ताव सफल हो पाएगा और जन आंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस विचार को देश के लिए एक बड़ी दिशा बताया और कहा कि हम सबको इस दिशा में कदम बढ़ाना होगा।

समारोह में मौजूद गणमान्य व्यक्ति और नेताओं का योगदान
इस अवसर पर चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, पूर्व सांसद दिनेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर जगदलपुर संजय पांडे, जिला भाजपा अध्यक्ष वेदप्रसाद पांडे सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेता, कार्यकर्ता और समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। सभी ने इस पहल का समर्थन करते हुए एक राष्ट्र एक चुनाव के महत्व पर बल दिया।
