सरकारी सम्मान में नया अध्याय: तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नाम शिलापट्ट में दर्ज

  • नवा रायपुर में मुख्यमंत्री ने किया राज्य स्तरीय आदिवासी संग्रहालय का उद्घाटन, कर्मचारियों को मिला ऐतिहासिक सम्मान

Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में 14 मई 2025 को इतिहास रच दिया गया। आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में बने राज्य स्तरीय आदिवासी संग्रहालय का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक अनोखी मिसाल पेश की। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पहली बार किसी सरकारी भवन के शिलापट्ट में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नाम भी अधिकारियों के साथ अंकित किए गए, जिससे इन कर्मचारियों के आत्मसम्मान और योगदान को सार्वजनिक रूप से मान्यता मिली।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुआ ऐतिहासिक कदम

राज्य स्तरीय आदिवासी संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए बने इस संग्रहालय का शुभारंभ किया। लेकिन समारोह को खास बना दिया उस निर्णय ने, जिसमें भवन निर्माण से जुड़े तृतीय (जैसे लिपिक, सहायक) और चतुर्थ (जैसे चपरासी, भृत्य) श्रेणी कर्मचारियों के नाम शिलापट्ट में दर्ज किए गए। यह पहली बार हुआ है जब सरकारी कर्मचारी वर्ग के इन सदस्यों को ऐसा सार्वजनिक और बराबरी का सम्मान मिला है।

कर्मचारी संघ की भूमिका रही अहम

इस ऐतिहासिक पहल के पीछे छत्तीसगढ़ संचालनालयीन कर्मचारी संघ इंद्रावती भवन की विभागीय समिति – आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान – की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संघ के अध्यक्ष जय कुमार साहू, विभागीय समिति अध्यक्ष योगेश निषाद, संगठन सचिव लोकेश वर्मा, सदस्य अरुणेंद्र पांडेय और हमप्रसाद गायकवाड़ ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि कर्मचारी वर्ग को उसका सम्मान मिल सके। संघ की ओर से उद्घाटन के बाद प्रभारी संचालक गायत्री नेताम को पुष्पगुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। नेताम ने इस ऐतिहासिक निर्णय को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम बताया।

संग्रहालय में झलकती है आदिवासी संस्कृति

नवनिर्मित संग्रहालय में छत्तीसगढ़ की आदिवासी परंपराओं, जीवनशैली, कला और हस्तशिल्प को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है। यह संग्रहालय न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आदिवासी संस्कृति की समझ भी देगा। यह निर्णय छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। पहली बार कर्मचारियों को समान सम्मान देकर यह दिखाया गया है कि हर स्तर का योगदान मूल्यवान होता है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अन्य सरकारी विभाग भी इसी प्रकार अपने कर्मचारियों को सम्मान देने की दिशा में कदम उठाएंगे।

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