रायपुर @ मालवीय रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर (लघु तीर्थ) में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के पावन अवसर पर एक भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। रविवार सुबह 8:30 बजे मंदिर प्रांगण श्रावक-श्राविकाओं की भक्ति और श्रद्धा से गूंज उठा, जब 23वें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ भगवान का रजत कलशों से अभिषेक, शांति धारा और विशेष पूजन विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ।

यह आयोजन वर्तमान समय में देश और दुनिया में शांति, समृद्धि और सौहार्द्र बनाए रखने की कामना के साथ किया गया। मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि जैन धर्म हमेशा से अहिंसा, सत्य और संयम की शिक्षा देता आया है। आज जब भारत देश बाहरी खतरों से बहादुरी के साथ सामना कर रहा है, ऐसे समय में समाज की यह पहल आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा देने वाली है।
पूजन की शुरुआत मंगलाष्टक पाठ और जल शुद्धि मंत्रों से हुई। सभी श्रद्धालुओं ने शुद्ध वस्त्र धारण कर, भक्तिभाव से अभिषेक पाठ पढ़ते हुए श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा को जयकारों के साथ विराजमान किया। इसके बाद सभी ने रजत कलशों से शांत भाव से अभिषेक किया। विशेष शांति धारा का सौभाग्य प्रवीण जैन (मामा जी) को प्राप्त हुआ, जिसका मंत्रोच्चार श्रेयश जैन बालू ने किया।

शांति धारा के बाद संगीतमय आरती में सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके उपरांत सभी ने अष्ट द्रव्यों से निर्मित अर्घ्य चढ़ाकर भगवान श्री पार्श्वनाथ का विधिवत पूजन किया। “ॐ ह्रीं श्री पार्श्वनाथ जिनेन्द्राय अनर्घ्य पद प्राप्तये अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा” मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य समर्पित किए गए। अंत में पूजन का विसर्जन पाठ कर विधिपूर्वक समापन हुआ।
इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर श्रद्धा से प्रार्थना करता है, तो सकारात्मक ऊर्जा पूरे वातावरण को शुद्ध करती है। जैन समाज की यह पहल न केवल आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि देश और दुनिया में शांति की कामना का सशक्त माध्यम भी है।
