दिनेश यदु @ Raipur : राज्य महिला आयोग ने शुक्रवार को महिलाओं से जुड़े उत्पीड़न के मामलों की जनसुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य लक्ष्मी वर्मा की मौजूदगी में रायपुर जिले की 152वीं और राज्य की 310वीं जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान कई पीड़ित महिलाओं को राहत मिली और आयोग की समझाइश से कुछ मामलों में आपसी सहमति भी बनी।

एक प्रमुख मामले में प्रताड़ना झेल रही महिला ने बताया कि उसका 14 वर्षीय बेटा भी अब पिता के खिलाफ हो गया है। महिला ने मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की बात कहकर आरोपी पति के साथ रहने से इंकार कर दिया। आयोग ने दोनों पक्षों को काउंसलिंग के माध्यम से आपसी सहमति से तलाक लेने की सलाह दी। आरोपी पति ट्रांसपोर्ट ब्रोकर है और हर महीने 55 हजार रुपए कमाता है। आयोग की समझाइश के बाद वह हर महीने महिला और बच्चे के लिए 12 हजार रुपए भरण-पोषण देने को तैयार हुआ। साथ ही बच्चे की स्कूल और ट्यूशन फीस का खर्च अलग से वहन करने की बात भी मान ली।

दूसरे मामले में एक महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी बेटी को सामाजिक रूप से घर में आने से रोक दिया है। सुनवाई के दौरान आरोपी ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। आयोग ने इसे स्वीकारते हुए मामला नस्तीबद्ध कर दिया।
एक अन्य प्रकरण में आरोपी पति ने आयोग के सामने स्वीकार किया कि वह घर का राशन और अन्य खर्चों के अलावा हर महीने महिला को 4 हजार रुपए भरण-पोषण देगा। इस मामले की निगरानी आयोग एक साल तक करेगा ताकि महिला को समय पर सहायता मिलती रहे।

एक और मामले में महिला ने कार्यस्थल पर आरोपी द्वारा लैंगिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था, लेकिन अभी तक कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति की रिपोर्ट नहीं मिली है। आरोपी का कहना है कि वह निर्दोष साबित हो चुका है, वहीं महिला का आरोप है कि उसे कॉलेज से निकाल दिया गया। आयोग ने कॉलेज के प्राचार्य को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में समिति की रिपोर्ट और समिति अध्यक्ष के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

एक पुराने मामले में महिला ने बताया कि आरोपी पति ने विवाह के बाद उसके पुराने रिकॉर्ड निकालकर चरित्र हनन की कोशिश की, जिससे वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ा। पहले दोनों को आपसी सहमति से तलाक की सलाह दी गई थी। आरोपी 5 लाख रुपए देने को तैयार था, लेकिन महिला ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। आज की सुनवाई में भी दोनों पक्ष सुलहनामा के लिए तैयार नहीं हुए। आरोपी के पास अब भी महिला का विवाह में दिया गया सामान है। ऐसे में आयोग ने महिला को कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी और कहा कि वह दीवानी या आपराधिक मामला दर्ज कर सकती है। यह मामला भी इस स्तर पर नस्तीबद्ध कर दिया गया।
