देश की पहली फिल्म लोककला व मिनी टॉकीज सहकारी समिति छत्तीसगढ़ में गठित

  • प्रदेश के 5 संभागों में हुआ गठन, 25 मिनी टॉकीज और फिल्म ट्रेनिंग सेंटर की योजना

दिनेश यदु @ Raipur : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कलाकारों को नया मंच देने के उद्देश्य से राज्य में पहली बार छत्तीसगढ़ फिल्म लोककला एवं मिनी टॉकीज सहकारी समिति मर्या. (CFLMT) का गठन किया गया है। यह समिति देश की पहली ऐसी सहकारी संस्था है, जो एक साथ फिल्म निर्माण, लोकगीत-संगीत, पारंपरिक कलाओं और मिनी टॉकीज के लिए कार्य कर रही है।

समिति के प्रदेश अध्यक्ष अमित परगनिहा और रायपुर संभाग अध्यक्ष अलका परगनिहा (चंद्राकर) ने जानकारी दी कि अब तक रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और बस्तर में समिति का पंजीयन हो चुका है। पदाधिकारी भी निर्वाचित कर लिए गए हैं और आगे चलकर राज्य स्तरीय फेडरेशन गठित करने की तैयारी की जा रही है।

40 हजार से ज्यादा कलाकार होंगे सदस्य

समिति का लक्ष्य है कि राज्य के 40,000 से अधिक पारंपरिक वादक, गायक, नर्तक, रंगकर्मी, लोकगीत गायक और फिल्म तकनीशियन युवाओं को इससे जोड़ा जाए। यह कलाकार समिति के माध्यम से प्रशिक्षण, मंच और आर्थिक सहयोग प्राप्त करेंगे।

ब्लॉक स्तर पर बनेंगे मिनी टॉकीज

छोटे शहरों और ब्लॉकों में 200 से 250 सीटों वाले 25 मिनी टॉकीज अगले तीन वर्षों में खोले जाएंगे। यहां लोक कलाकारों को प्रस्तुति का मौका मिलेगा और स्थानीय भाषाओं की फिल्में भी दिखाई जाएंगी।

फिल्म निर्माण, ट्रेनिंग और फेस्टिवल

समिति द्वारा इंटरनेशनल ट्राइबल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़ी और जनजातीय भाषाओं में फिल्म निर्माण, प्रदर्शन और वितरण की व्यवस्था की जाएगी।
सदस्यों को फिल्म मेकिंग, VFX, एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग कम दरों पर या मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर 3 से 5 लाख तक का लोन और बीमा सुविधा भी दी जाएगी।

बस्तर को मिलेगा विशेष तकनीकी सहयोग

बस्तर क्षेत्र के कलाकारों को हल्बी, गोड़ी जैसी भाषाओं में फिल्म निर्माण के लिए तकनीकी सहायता और टॉकीज सुविधाएं दी जाएंगी। इससे वहां की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुंगेली में शुरू हुआ पहला लोक कला केंद्र

राज्य के प्रत्येक जिले में लोक कला केंद्र खोले जाने की योजना है। पहला केंद्र मुंगेली जिले में प्रारंभ हो चुका है।

स्कूलों में लोककला की पढ़ाई

समिति की योजना है कि सरकारी स्कूलों में लोकगीत, वादन और नृत्य जैसी पारंपरिक विधाओं की शिक्षा दी जाए। इससे बच्चों में लोकसंस्कृति के प्रति रुचि बढ़ेगी और कलाकारों को रोजगार मिलेगा।

भविष्य की योजना—फिल्म सिटी और सैटेलाइट चैनल

आगे चलकर समिति छत्तीसगढ़ में फिल्म सिटी, रिसर्च सेंटर और सैटेलाइट टीवी चैनल की भी शुरुआत करने की योजना बना रही है, ताकि छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।

अमित परगनिहा और अलका परगनिहा ने बताया कि समिति का उद्देश्य केवल मंच प्रदान करना नहीं, बल्कि लोक कलाकारों का आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण करना है। यह समिति लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *