507 प्रशिक्षण अधिकारियों को न्यायालय से राहत, सेवा समाप्ति पर रोक

  • हाईकोर्ट ने लगाए आरोप पत्र पर स्टे, जवाबदेही अधिकारियों पर भी उठे सवाल

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग में वर्ष 2013 में नियुक्त हुए 507 प्रशिक्षण अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। विभाग द्वारा सेवा समाप्ति की प्रक्रिया के तहत जारी किए गए आरोप पत्र पर अब माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन (स्टे) आदेश जारी किया है। इससे इन अधिकारियों की नौकरी फिलहाल बच गई है।

गौरतलब है कि विभाग ने 21 मार्च 2025 को एक पांच पन्नों का आरोप पत्र जारी कर इन 507 अधिकारियों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। आरोप लगाया गया कि भर्ती के दौरान आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इसके खिलाफ सभी अधिकारी न्याय की शरण में पहुंचे और अधिवक्ता फैजल अख्तर, जितेंद्र पाली एवं एच. ए. पी. एस. भाटिया के माध्यम से हाईकोर्ट में पैरवी की।

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने सुनवाई करते हुए इन अधिकारियों को अंतरिम राहत दी और आरोप पत्र पर रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने विभाग के संचालक को निर्देश दिया कि वह इस मामले में व्यक्तिगत एफिडेविट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करें कि आरोप पत्र क्यों जारी किया गया और नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के लिए जवाबदेह अधिकारियों पर क्या कार्यवाही की गई।

यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2021 में भी इसी विभाग के 50 प्रशिक्षण अधिकारियों को सेवा से हटाने का प्रयास किया गया था, परंतु अदालत में हुई पैरवी के बाद हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। अब फिर से 507 अधिकारियों को सेवा से हटाने की कोशिश की गई थी, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी है।

छत्तीसगढ़ राज्य इंजीनियर्स प्रशिक्षण अधिकारी कल्याण संघ के संरक्षक एडवोकेट पूरन सिंह पटेल ने बताया कि यह आदेश न केवल इन 507 अधिकारियों के लिए बल्कि भविष्य में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए भी एक मिसाल है। उन्होंने बताया कि संघ इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह सजग है और कर्मचारी हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रहेगी।

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