– करीगांव में सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद
दिनेश यदु @ Raipur : सुशासन तिहार 2025 के तीसरे चरण की शुरुआत सोमवार को एक बेहद खास अंदाज में हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर से हेलीकॉप्टर के ज़रिए आकस्मिक दौरा किया और सीधे सक्ती जिले के बंदोरा गांव के करीगांव पहुंच गए। यहां उन्होंने किसी मंच या सरकारी बैठक नहीं, बल्कि एक पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई, जहां वे खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं।

करीगांव की मिट्टी में घुले ग्रामीणों ने कमल का फूल भेंट कर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाएं भी बड़ी संख्या में चौपाल में पहुंचीं और अपनी बातें सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। यह नज़ारा कुछ अलग ही था—न कोई औपचारिकता, न कोई भाषण—सिर्फ सादगी, संवाद और समाधान की भावना।
मुख्यमंत्री ने चौपाल में बैठकर ग्रामीणों से पूछा कि क्या योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है? बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य, स्कूल जैसी बुनियादी जरूरतों पर उनकी प्रतिक्रिया क्या है? लोग बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रख रहे हैं। मुख्यमंत्री हर व्यक्ति की बात ध्यान से सुन रहे हैं और मौके पर ही अफसरों को निर्देश भी दे रहे हैं।

यह पहल ‘सुशासन तिहार 2025’ के उस उद्देश्य को पूरा करती है, जिसमें सरकार खुद जनता के दरवाज़े तक जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “8 अप्रैल से शुरू हुए सुशासन तिहार के तीसरे चरण का मकसद सिर्फ आवेदन लेना नहीं, बल्कि उनकी सुनवाई और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। अब तक 40 लाख आवेदन आए हैं, जिन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।”
उन्होंने यह भी दोहराया कि “सरकार अब सिर्फ दफ्तरों में नहीं, बल्कि गांवों की चौपाल में, पीपल के पेड़ की छांव में और जनता की दहलीज पर खड़ी है। यह शासन का नया रूप है, जहां आम आदमी की बात सबसे अहम है।”

करीगांव चौपाल की मुख्य बातें
मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर बंदोरा गांव के करीगांव में अचानक उतरा
ग्रामीणों और महिलाओं ने कमल फूल देकर स्वागत किया
पीपल के पेड़ के नीचे लगी चौपाल, मुख्यमंत्री खाट पर बैठे
ग्रामीणों से योजनाओं पर फीडबैक और समस्याएं सुनी गईं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौके पर ही दिए निर्देश
सुशासन तिहार में अब तक 40 लाख आवेदन, समाधान जारी
इस नई कार्यशैली से ग्रामीणों में भरोसा जगा है। पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि सरकार वास्तव में “जनता की सरकार” बनकर उनके बीच आ रही है। करीगांव के लोग अब यही कह रहे हैं— “जब मुख्यमंत्री हमारे चौपाल तक आ सकते हैं, तो अब हमारी बात ज़रूर सुनी जाएगी।”
