- जय भारत स्कूल में हुआ सेमिनार, बच्चों को समझाया गया सही और गलत स्पर्श का फर्क
दिनेश यदु @ Raipur:आज के समय में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। छोटी उम्र में ही कई बच्चे यौन शोषण जैसी गंभीर घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को समय रहते सही जानकारी दी जाए ताकि वे अपने साथ कुछ गलत होने पर समझ सकें और उसकी शिकायत कर सकें। इसी उद्देश्य को लेकर समाजसेविका काजल कसेर ने जांजगीर के जय भारत स्कूल में “गुड टच-बैड टच” पर एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया।

सेमिनार में बच्चों को यह बताया गया कि कौन सा स्पर्श उन्हें सुरक्षित महसूस कराता है और कौन सा असहज कर देता है। काजल कसेर ने सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को समझाया कि अच्छा स्पर्श वह होता है जो प्यार, देखभाल और सुरक्षा का भाव देता है – जैसे मम्मी-पापा का गले लगाना या टीचर का पीठ थपथपाना। वहीं बुरा स्पर्श वह होता है जो असहज, डरावना या उलझन भरा लगे – जैसे जब कोई बिना अनुमति के निजी अंगों को छूने की कोशिश करे।

इस अवसर पर काजल कसेर ने कहा, “देश में बढ़ रहे यौन अपराधों को रोकने के लिए हमें शुरुआत बच्चों से ही करनी होगी। जब बच्चे यह जान जाते हैं कि उनके साथ कुछ गलत हो रहा है, तो वे समय पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं और खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।”
सेमिनार में बच्चों को तीन जरूरी बातें सिखाई गईं:
- ना कहना सीखें: अगर कोई गलत तरीके से छुए, तो ज़ोर से “नहीं” कहें।
- मदद माँगें: भरोसेमंद बड़े जैसे माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को तुरंत बताएं।
- खुद को बचाएं: उस स्थान से तुरंत हटें और खुद को सुरक्षित जगह पर ले जाएं।
कार्यक्रम में प्राचार्या गुरमीत कौर, बबीता अग्रवालशिक्षक अमन नामदेव, शालिनी सिंह, अंजू यादव, कृष्णा देवांगन, ममता साहू सहित कई अभिभावक भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसी शिक्षा देना बेहद जरूरी हो गया है।

कुल मिलाकर, यह सेमिनार बच्चों के आत्म-सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम था। ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में जागरूकता बढ़ती है और वे खुद की सुरक्षा करना सीखते हैं। समाजसेविका काजल कसेर का यह प्रयास न सिर्फ बच्चों बल्कि उनके अभिभावकों के लिए भी एक सीख है कि बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उन्हें हर स्थिति के लिए तैयार करें।
