- मोवा में वन विभाग ने की छापेमारी, शिकारी गिरफ्तार
दिनेश यदु @ Raipur : मोवा क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शिकारी आरोपियों को हिरण के सिंग के साथ गिरफ्तार किया है। यह छापेमारी तब हुई जब वन विभाग को गश्त के दौरान एक सटीक सूचना मिली और तुरंत कार्रवाई की गई। वन विभाग ने मोवा क्षेत्र में दो शिकारी आरोपियों, काजी अब्दुल यासिर और काजी मोहम्मद फरहान, को हिरण के सिंग के साथ गिरफ्तार किया। आरोपियों ने हिरण के सिंग को सफेद बोरी में छुपाकर रखा था, जो छापेमारी के दौरान बरामद किया गया। इसके साथ ही वन विभाग ने हिरण का मांस, खाल, खोपड़ी और एक वाहन भी जब्त किया, जिससे यह पुष्टि हुई कि शिकार एक चीतल (हिरण) का था, जो कि पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।

शिकारियों की गोलमोल बातें बढ़ाईं संदेह
आरोपियों से पूछताछ में गोलमोल जवाब मिले, जिससे वन विभाग की टीम को शक हुआ कि वे वन्यजीवों के शिकार से जुड़े अपराधों में शामिल हो सकते हैं। उनके जवाबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश हो सकती है, जिस पर ध्यान केंद्रित किया गया।
“सिंघम की टीम” ने की छापेमारी
इस ऑपरेशन की अगुआई प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव के मार्गदर्शन में की गई। रायपुर वन मंडल अधिकारी और संयुक्त वन मंडल अधिकारी रायपुर की टीम ने मिलकर इसे अंजाम दिया। रेंजर दीपक तिवारी और उनकी टीम, जिसे ‘सिंघम की टीम’ के नाम से जाना जाता है, ने इस अभियान को सफलता दिलाई। उनकी चौकस निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के कारण इस छापेमारी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

पिछली साजिशों के खुलासे की संभावना
उप वनमंडलाधिकारी विश्वनाथ मुखर्जी ने बताया कि वन विभाग की टीम आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में बीएफओ अमृतपाल, भूपेंद्र खैरवार, दीपक वर्मा और गोस्वामी सहयोगी यशपाल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। इनकी मेहनत और समर्पण के कारण वन विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि वन्यजीवों का शिकार करने वाले किसी भी आरोपी को बचने का मौका नहीं मिलेगा।
आगे की कार्यवाही और छापेमारी
वन विभाग की टीम अब आरोपियों से और पूछताछ करेगी और उनके नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। इसके अलावा, आगे भी छापेमारी की योजना बनाई जा रही है ताकि इस साजिश के अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके। वन विभाग इस घटना को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम मान रहा है और यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि ऐसे अपराधों को बख्शा नहीं जाएगा।

संवेदनशीलता से वनों की सुरक्षा का संदेश
इस कार्रवाई से यह संदेश दिया गया है कि वन विभाग अपनी जिम्मेदारी के प्रति सख्त है और ऐसे अपराधों को सख्ती से रोका जाएगा। इन गिरफ्तारियों से यह साबित होता है कि वन विभाग द्वारा की जा रही गश्त और छापेमारी से शिकारियों के नेटवर्क पर प्रभावी तरीके से अंकुश लगाया जा सकता है। वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है और भविष्य में और भी छापेमारी की योजना बनाई जा सकती है।
