प्यासे वन्य प्राणियों पर मंडरा रहा शिकार का खतरा, वन मंत्री को भेजा सुझाव पत्र

  • हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान ने की अपील—गर्मियों में वन क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था और गश्ती बढ़ाई जाए
  • पालतू कुत्तों और शिकारियों पर कड़ी निगरानी हो

Raipur : बिलासपुर गर्मियों के आते ही जंगलों में जल स्रोत सूखने लगते हैं, जिससे वन्य प्राणी प्यास बुझाने के लिए जंगलों से बाहर आने को मजबूर हो जाते हैं। यही समय होता है जब शिकारी और पालतू कुत्ते उन्हें अपना निशाना बनाते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड के पूर्व सदस्य और हाथी विशेषज्ञ मंसूर खान ने वन मंत्री को एक विस्तृत सुझाव पत्र भेजा है। इस पत्र में गर्मियों में वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

सूखते जल स्रोत और थक चुके वन्य प्राणी बनते हैं शिकार का आसान निशाना

मंसूर खान ने पत्र में बताया है कि 15 मार्च से 15 जून तक का समय वन्य प्राणियों के लिए सबसे कठिन होता है। पानी की तलाश में वे थक कर चूर हो जाते हैं और ऐसे में शिकारी या कुत्तों के लिए वे आसान शिकार बन जाते हैं। शिकारी तीर-धनुष, बंदूक, फंदा, करंट, बम, कीटनाशक जैसे कई खतरनाक तरीकों से शिकार करते हैं। वहीं, पालतू कुत्ते भी जंगल में जाकर शिकार कर घायल जानवर को मालिक तक ले आते हैं।

मानव बस्ती की ओर आते हैं घायल वन्य प्राणी, मदद की तलाश में

जब वन्य प्राणी घायल या बीमार होते हैं तो वे इंसानों से सहायता की उम्मीद लेकर गांव या शहर की ओर आ जाते हैं। कई बार वे बस्तियों के तालाब या बोरवेल से पानी पीने आते हैं, जिससे उनकी और लोगों की सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती है।

सुरक्षा और जल की व्यवस्था हेतु मंसूर खान के सुझाव

हाथी विशेषज्ञ ने सुझाव दिया है कि जंगल के भीतर सुरक्षित और गहरे जलस्रोत बनाए जाएं। अगर प्राकृतिक स्रोत नहीं हैं तो कृत्रिम सासर बनाए जाएं और उनमें 2000 लीटर या उससे अधिक पानी भरवाया जाए। पानी साफ हो और भराई का समय ऐसा हो जब वन्य प्राणी वहां न हों।

गश्त 24 घंटे चले और इसमें लगे अधिकारी-कर्मचारी किसी अन्य कार्य में न लगाए जाएं। पालतू कुत्तों पर नजर रखी जाए और शिकार में शामिल पाए जाने पर उनके मालिक पर कार्रवाई हो। जंगल के पास चराने वाले चरवाहों से भी सूचनाएं ली जाएं और सहयोगियों को सम्मानित किया जाए।

शिकार रोकने वालों को मिलना चाहिए सम्मान

मंसूर खान ने यह भी कहा कि जिन अफसरों और ग्रामीणों के क्षेत्र में शिकार नहीं होता और जो शिकारियों को पकड़ते हैं, उन्हें सरकार की ओर से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाए ताकि वन्य प्राणी संरक्षण को लेकर सकारात्मक माहौल बन सके।

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