स्थानीय लोगों की मदद से ही रुकेगा शिकारियों का आतंक
वन विभाग ने कसी कमर, गर्मी में करंट बिछाकर वन्यजीवों की हत्या
Raipur @ गर्मी बढ़ते ही जंगलों में खतरे भी बढ़ने लगे हैं। महासमुंद जिले के बागबाहरा वन परिक्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां शिकारियों ने करंट बिछाकर एक नर तेंदुए और एक नर बायसन (गौर) की जान ले ली। यह घटना खल्लारी सर्किल के मातेश्वरी पहाड़ी के पास, नेशनल हाईवे-353 से सटे जंगल में हुई। सोमवार सुबह जब वन विभाग की टीम गश्त पर थी, तब दोनों जानवरों के शव मिले।
जांच में सामने आया है कि दोनों जानवरों की मौत बिजली के करंट से हुई है। विभाग ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शवों का पंचनामा बनवाया और पोस्टमार्टम करवाया। इस घटना ने वन विभाग को सतर्क कर दिया है। महासमुंद डीएफओ पंकज राजपूत ने इसे बहुत गंभीर मानते हुए आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

डीएफओ राजपूत ने कहा कि “गर्मी में पानी की कमी और छांव की तलाश में जानवर अक्सर इंसानी इलाकों के पास आ जाते हैं। इसका फायदा उठाकर शिकारी करंट बिछाकर उन्हें मार देते हैं। यह तरीका शिकारियों के लिए आसान लेकिन जानवरों और जंगल के लिए बेहद खतरनाक है।”
करंट से शिकार बन रहा आम तरीका
गर्मी के मौसम में शिकारी अधिक सक्रिय हो जाते हैं। जंगलों में लगे बिजली के तारों का उपयोग करके वे जानवरों के आने-जाने वाले रास्तों में करंट छोड़ देते हैं। जानवर जैसे ही संपर्क में आते हैं, उनकी मौके पर ही मौत हो जाती है। यह तरीका शिकारियों के लिए पकड़े जाने से बचने का आसान तरीका बन गया है, क्योंकि इसमें वे सीधे हाथ नहीं लगाते।

वन विभाग की कार्रवाई और योजना
इस घटना के बाद विभाग ने जंगल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया है। जंगलों में गश्त बढ़ाई जा रही है और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और कैमरों की मदद ली जा सकती है। साथ ही वनकर्मियों की संख्या भी बढ़ाने की योजना पर काम हो रहा है। वन अधिकारी ने कहा, “हम आने वाले दिनों में जंगलों में सघन तलाशी अभियान चलाएंगे। जो लोग इस अपराध में शामिल हैं, उन्हें जल्द ही पकड़ा जाएगा।”

बीजापुर में बाघ घायल, फंदे में फंसकर कई दिन तड़पता रहा
दूसरी ओर, 16 अप्रैल को बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कांदुलनार-तोयनार इलाके के जंगल में एक नर बाघ फंदे में बुरी तरह फंसकर गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय ग्रामीणों से सूचना मिलने पर वन विभाग ने घायल बाघ को ट्रैकुलाइज कर रेस्क्यू किया और इलाज के लिए रायपुर स्थित जंगल सफारी भेजा गया।
बाघ के दोनों पिछले पैरों में गहरे जख्म मिले हैं। वन चिकित्सकों के अनुसार, जख्म काफी पुराने हैं, जिससे उसमें सड़न शुरू हो चुकी थी। आशंका जताई जा रही है कि बाघ कई दिनों से दर्द में था और शिकार की तलाश में भटक रहा था।
