सरजूबांधा तालाब में मलबा डालकर बनाई जा रही सड़क, पर्यावरण पर खतरे की घंटी

सत्यमेव जयते फाउंडेशन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, शासकीय स्वीकृति की समीक्षा की मांग

रायपुर @ राजधानी के टिकरापारा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक सरजूबांधा तालाब एक बार फिर अतिक्रमण की चपेट में है। तालाब के किनारे 40 से 50 फीट तक की भूमि में मलबा डालकर सड़क निर्माण कराया जा रहा है। इस पर सत्यमेव जयते फाउंडेशन ने आपत्ति जताते हुए रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह को ज्ञापन सौंपा है।

फाउंडेशन के प्रदेश संयोजक कन्हैया अग्रवाल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उमंग कॉलोनी के पीछे से सैकड़ों ट्रैक्टर मलबा डालकर तालाब को पाटने का कार्य चल रहा है। तालाब की जल सीमा से 50 मीटर तक की जमीन पर मलबा भराव किया गया है, ताकि उसे सूखी भूमि घोषित कर निर्माण को जायज ठहराया जा सके। यह पूरी प्रक्रिया न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि जल स्रोत और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा भी है।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि इस कार्य को शासन की किसी योजना के अंतर्गत स्वीकृति दी गई है, तो उसकी समीक्षा होनी चाहिए। अगर स्वीकृति नियमों के विरुद्ध है, तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यह कार्य नगर निगम, राजस्व विभाग और पर्यावरण विभाग की मिलीभगत से हो रहा है।जोन कमिश्नर द्वारा दिए गए बयान में यह स्वीकार किया गया है कि दलदली भूमि काटकर सड़क बनाई जा रही है, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि जल भूमि को ही पाटकर निर्माण कराया जा रहा है।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि तालाब के अस्तित्व और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए तत्काल अतिक्रमण रोकने के आदेश जारी किए जाएं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधिमंडल में मनोज पाल, मोहम्मद सिद्दीक, राजेश त्रिवेदी, शरद गुप्ता, देवेंद्र पवार, राज देवांगन और अतुल रघुवंशी शामिल रहे।

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