शावकों की मौत से उजागर हुई जंगल सफारी की लापरवाही, 13 अप्रैल को हुई मौत की जानकारी 16 को

  • प्रसव के समय ही एक शावक मृत, दूसरा आठ दिन बाद दम तोड़ा
  • पारदर्शिता की कमी पर उठे सवाल

रायपुर @ एशिया की सबसे बड़ी बताई जाने वाली नंदनवन जंगल सफारी एक बार फिर विवादों में है। यहां रहने वाली बाघिन ‘बिजली’ ने 6 अप्रैल 2025 को दो बाघ शावकों को जन्म दिया था। इनमें एक शावक तो जन्म के समय ही मृत मिला, जबकि दूसरा शावक कमजोर था और लगातार निगरानी के बाद भी 13 अप्रैल को उसकी हालत बिगड़ गई। उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन अगले दिन यानी 14 अप्रैल को उसने दम तोड़ दिया।

सबसे गंभीर बात यह है कि दोनों शावकों की मौत की जानकारी न तो तुरंत दी गई और न ही मीडिया को बताया गया। वन विभाग ने 16 अप्रैल को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मौत की पुष्टि की, जबकि मामला पहले ही सार्वजनिक होना चाहिए था। इससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कमजोरी बनी मौत की वजह, इलाज नाकाम


सफारी प्रबंधन के मुताबिक, जन्म के समय ही एक शावक मृत था। दूसरा शावक बेहद कमजोर था, जिसे सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया था। जानकारी के अनुसार 13 अप्रैल को शावक ने सिर्फ एक बार ही दूध पिया। उसकी हालत बिगड़ने पर 14 अप्रैल को दोपहर 3:20 बजे उसे मां से अलग कर नियोनाटल केयर यूनिट में लाया गया। जांच में उसका शरीर का तापमान 92°F (33.3°C) पाया गया, जो सामान्य से काफी कम था। तत्काल इलाज शुरू किया गया, लेकिन दोपहर 3:28 बजे उसकी मौत हो गई।

मौत क्यों छिपाई गई?

बिजली के शावकों के जन्म की खबर वन विभाग ने बड़े उत्साह के साथ साझा की थी। लेकिन जब उनकी मौत हुई तो विभाग ने चुप्पी साध ली। इस देरी से वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह सिर्फ एक ‘उपलब्धि दिखाने’ की कोशिश है, जबकि असफलता छुपाने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है।

पहले भी जन्म दे चुकी है बिजली

यह पहली बार नहीं है जब बाघिन बिजली ने शावकों को जन्म दिया हो। 29 अगस्त 2023 को भी उसने चार शावकों को जन्म दिया था और उनका बर्थडे सफारी प्रबंधन ने धूमधाम से मनाया था।

सफारी की व्यवस्था पर फिर सवाल

नंदनवन जंगल सफारी में बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू जैसे बड़े वन्य प्राणी हैं और लाखों पर्यटक हर साल यहां आते हैं। लेकिन जानवरों की देखरेख को लेकर सवाल पहले भी उठते रहे हैं। अब शावकों की मौत और सूचना छिपाने की घटना से साफ है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वन्यजीव जानकारों का मानना है कि शावकों की मौत होना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पारदर्शिता न होना ज्यादा चिंताजनक है। एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा, “खुशी में प्रचार और दुख में चुप्पी विभाग की दोहरी नीति को उजागर करती है। पीसीसीएफ  वाइल्ड लाइफ सुधीर अग्रवाल ने कहा किबाघिन बिजली ने छह अप्रैल को दो शावकों को जन्म दिया था। एक मृत पैदा हुआ था, दूसरा बेहद कमजोर था जिसकी मौत 13 अप्रैल को हो गई। मौत की वजह कमजोरी थी।”

जरूरत है जवाबदेही की

यह घटना बताती है कि जंगल सफारी जैसे बड़े प्रोजेक्ट में केवल दिखावे से काम नहीं चलेगा। जानवरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। वरना ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे और जनता का भरोसा कम होता जाएगा।

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