- जंगल सफारी में नियमों की अनदेखी: चार विषय विशेषज्ञों को हटाने के आदेश, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की चेतावनी
दिनेश यदु @ Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में स्थित नंदनवन जंगल सफारी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला सफारी में नियमों को दरकिनार करते हुए चार विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति का है, जिसे लेकर प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीवन प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय ने गंभीर रुख अपनाया है।
कार्यालय ने जंगल सफारी प्रबंधन को आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि बिना अनुमोदन नियुक्त किए गए इन चार विशेषज्ञों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाएगी, यदि आदेश का पालन नहीं किया गया।

बिना अनुमति नियुक्त हुए विशेषज्ञ
मिली जानकारी के अनुसार, नवा रायपुर के जंगल सफारी में चार व्यक्तियों – श्रीमती रिद्धी गोस्वामी, कु. ऋचा कुमार, श्री खिलेश्वर निषाद और श्री उपेन्द्र कुमार साहू को विषय विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त किया गया था। उन्हें प्रतिमाह ₹35,000 से ₹45,000 का मानदेय भी दिया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इनकी नियुक्ति वरिष्ठ कार्यालय की पूर्व स्वीकृति के बिना ही कर दी गई।
इन नियुक्तियों की शिकायत रायपुर के टाटीबंध निवासी मंजीत सिंह ने की थी। जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरा मामला नियमों के विरुद्ध है। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से इन्हें हटाने का सख्त आदेश जारी हुआ।
क्या जंगल सफारी में ‘फेसबुक विशेषज्ञ’ रखे गए हैं?
सूत्रों के अनुसार, जिन विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति हुई थी, उनमें से दो – श्री खिलेश्वर निषाद और उपेन्द्र साहू – सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्हें मुख्यतः फेसबुक पेज संचालन जैसे कार्यों के लिए रखा गया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या जंगल सफारी जैसे एक वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रकृति के केंद्र में सोशल मीडिया संचालन के लिए ₹35,000 प्रतिमाह खर्च करना उचित है?

आदेश में पूछे गए अहम सवाल
मुख्य वन्यजीव वार्डन ने जंगल सफारी के संचालक को आदेश में तीन बिंदुओं पर जवाब देने को कहा है:
क्या चारों विषय विशेषज्ञों को सेवा से हटाया गया है?
वर्तमान में कितने विषय विशेषज्ञ कार्यरत हैं, उनके नाम और संख्या क्या है? उन्हें किस बजट मद से भुगतान किया जा रहा है और कितनी राशि दी जा रही है?
साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में यदि किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता हो तो पहले प्रस्ताव भेजा जाए और नियमों के अनुसार मूल्यांकन के बाद ही अनुमति दी जाए।

पारदर्शिता की बात, पर पालन नहीं
इस आदेश में यह भी कहा गया है कि विषय विशेषज्ञों का चयन पारदर्शी तरीके से हो ताकि योग्य और अनुभवी लोग इस कार्य से जुड़ सकें। जंगल सफारी जैसी संस्था को सच्चे मायनों में विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, न कि सिर्फ नाम के विशेषज्ञों की।
हालांकि, इससे पहले भी पीसीसीएफ प्रेम कुमार द्वारा कई बार यह स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि नियम विरुद्ध रखे गए विशेषज्ञों को हटाया जाए। लेकिन आदेश के बावजूद चारों को सेवा में बनाए रखा गया, जिससे अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये चारों विशेषज्ञ किसी ‘बड़े संरक्षण’ में हैं? क्या इनकी ताकत पीसीसीएफ के आदेश से भी ज्यादा है?

जंगल सफारी की गरिमा को नुकसान
जंगल सफारी नवा रायपुर राज्य का एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय केंद्र है, जिसका उद्देश्य आम जनता को वन्यजीवों और जैव विविधता के बारे में जागरूक करना है। यदि वहां ऐसे लोगों की नियुक्ति होगी जो योग्य नहीं हैं, और जिनकी सेवाओं की आवश्यकता प्रमाणित नहीं है, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि इस प्रतिष्ठित परियोजना की गरिमा को भी नुकसान पहुंचाता है।
कर्मचारियों का आक्रोश: 6 जून को घेराव की चेतावनी
नंदनवन जंगल सफारी के कर्मचारियों ने बिना अनुमति नियुक्त विषय विशेषज्ञों को हटाने की मांग को लेकर डीएफओ को पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने 6 जून तक कार्रवाई नहीं होने पर घेराव की चेतावनी दी और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया की मांग की।
अब आगे क्या?
अब सभी की नजरें जंगल सफारी प्रशासन पर हैं कि वे कब तक इन नियुक्तियों को रद्द करते हैं और शासन के आदेश का पालन करते हैं। यदि ऐसा नहीं होता है, तो आदेश में यह भी उल्लेख है कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
