– वन विभाग की मेहनत ला रही रंग, भालुओं के प्राकृतिक रहवास में हो रहा सुधार

दिनेश यदु @ Raipur: गरियाबंद के घने जंगलों से एक बेहद सुखद और दुर्लभ खबर सामने आई है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगे ट्रैप कैमरे में एक मादा भालू अपने दो नन्हे शावकों के साथ नजर आई। खास बात यह रही कि दोनों शावक अपनी मां की पीठ पर सवार थे। यह दृश्य न केवल बेहद मनमोहक था, बल्कि यह भी दिखाता है कि जंगल में वन्यजीव खुद को अब पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
संरक्षण के प्रयासों का दिख रहा असर
वन विभाग के उपनिदेशक वरुण जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि यह दुर्लभ दृश्य विभाग के लगातार संरक्षण और निगरानी कार्यों का नतीजा है। उन्होंने बताया कि विभाग जंगल की सुरक्षा, वन्यजीवों की निगरानी और उनके प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसका सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

प्राकृतिक भोजन से भरपूर है जंगल
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जंगल भालुओं के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। यहां उन्हें शहद, मधुमक्खियों के छत्ते, दीमक, तेंदू फल और बाँबी जैसे भोजन आसानी से मिल जाते हैं। ये सभी भालुओं के प्रमुख आहार में शामिल होते हैं। यही कारण है कि भालू जंगल में ही रहना पसंद कर रहे हैं और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर जाने की घटनाएं कम होती जा रही हैं।

वन्यजीवों के लिए बेहतर माहौल
टाइगर रिजर्व में ट्रैप कैमरों के जरिए वन्यजीवों की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। यह तकनीक वन्यजीवों की मौजूदगी, उनकी संख्या और व्यवहार को समझने में काफी मददगार साबित हो रही है। मादा भालू और उसके बच्चों की यह झलक इस बात का प्रमाण है कि जंगलों में वन्यजीवों को अब पहले से ज्यादा शांति और सुरक्षा महसूस हो रही है।

भविष्य के लिए उम्मीद
इस तरह के दृश्य न केवल वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित करते हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि यदि सही प्रयास किए जाएं तो जंगलों में जैव विविधता को बचाया और बढ़ाया जा सकता है। उदंती का यह दृश्य आने वाले समय में अन्य जंगलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकता है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए यह एक उम्मीद की किरण है कि अगर इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे, तो जंगल अपने असली रंग में लौट सकते हैं।
