– संग्राहकों के हक पर डाका डालने वालों पर सरकार ने कसी नकेल, जांच में सामने आया 5 करोड़ से अधिक नगद भुगतान में घोटाला
दिनेश यदु @ Raipur : तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस वितरण में हुई भारी अनियमितताओं को लेकर छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सुकमा जिले की 11 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को भंग कर दिया है। साथ ही, इन समितियों के प्रबंधकों और संबंधित अधिकारियों को भी उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई माननीय वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर की गई है, जिन्होंने इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष और कठोर जांच के आदेश दिए थे।

क्या है मामला?
वर्ष 2021 और 2022 के दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस के रूप में ₹7.82 करोड़ से अधिक की राशि का वितरण किया जाना था। इसमें से ₹1.77 करोड़ बैंक खातों के माध्यम से भेजा गया जबकि ₹5.74 करोड़ की राशि नगद भुगतान के रूप में दी जानी थी। लेकिन जांच में सामने आया कि नगद भुगतान में संग्राहकों को तय राशि नहीं दी गई। कई मामलों में तो बोनस राशि सीधे गायब कर दी गई।
11 समितियां रडार पर, डीएफओ निलंबित
गोलापल्ली, कोंटा, किस्तराम, जगरगुंडा, फूलबागड़ी समेत कुल 11 समितियों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इन समितियों से जुड़े प्रबंधकों को हटाकर कारण बताओ नोटिस दिया गया, जिनका जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर समितियां भंग कर दी गईं। तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल को भी निलंबित कर दिया गया है। अब इन समितियों में नए प्राधिकृत अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं।

वसूली शुरू, 56 लाख रुपये की राशि लौटाई गई
जांच के बीच कुछ पूर्व प्रबंधकों ने अब तक 56.30 लाख रुपये की राशि जिला वनोपज सहकारी संघ के खाते में जमा की है। यह राशि अब पात्र संग्राहकों को सत्यापन के बाद लौटाई जाएगी। विभाग का कहना है कि जैसे-जैसे बाकी राशि की जानकारी सामने आएगी, वैसी ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
इस पूरे मामले में समितियों के पोषक अधिकारियों की भी भूमिका संदेह के घेरे में है। इन्हें वनमंडलाधिकारी सुकमा द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यदि इनका दोष सिद्ध होता है, तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

वन मंत्री ने जताई नाराज़गी
वन मंत्री केदार कश्यप ने साफ शब्दों में कहा है कि गरीब तेंदूपत्ता संग्राहकों के अधिकारों का हनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाएगा।

सरकार की मंशा साफ: पारदर्शिता और जवाबदेही
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है, और गरीबों के अधिकारों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरि है।
यदि आप चाहें तो इस खबर के लिए एक अलग स्थानीय प्रतिक्रिया या पीड़ित संग्राहकों की बात भी शामिल कर सकते हैं।
