Raipur : छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग ने 1 मई 2025 से लागू होने वाली दर अनुसूची का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में राज्य के जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप, सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो और प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उइके की गरिमामय उपस्थिति थे । इस नई दर अनुसूची के तहत निर्माण कार्यों के लिए शुल्क और लागत के नए मानक स्थापित किए गए हैं, जो न केवल पुराने एस.ओ.आर. (दर अनुसूची) के मुकाबले अधिक उपयुक्त हैं, बल्कि इससे निर्माण कार्यों में गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

नया दर अनुसूची क्यों आवश्यक था?
2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, जल संसाधन विभाग ने सिंचाई, जल संरक्षण और बांध निर्माण जैसे कार्यों में तेजी से प्रगति की है। इसके साथ ही, निर्माण तकनीकों, श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री की दरों में काफी बदलाव हुआ है। इसलिए, पिछले 15 वर्षों में बदलावों को ध्यान में रखते हुए एक नई दर अनुसूची की आवश्यकता महसूस हुई। नई दर अनुसूची में आधुनिक निर्माण तकनीकों, श्रमिकों की बढ़ती मजदूरी, सामग्री की लागत और उपकरणों के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखा गया है। इससे राज्यभर में निर्माण कार्यों में गति आएगी और काम के गुणवत्ता में सुधार होगा।

दर अनुसूची 2025 के मुख्य बिंदु
नई दर अनुसूची में मानक डेटा इकाई विश्लेषण पद्धति का उपयोग किया गया है, जिसे मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य निर्माण लागत को सही तरीके से निर्धारित करना है। साथ ही सामग्री की लागत, श्रमिकों की मजदूरी, मशीनरी और उपकरणों के किराया शुल्क, ईंधन शुल्क और ओवरहेड शुल्क का भी विश्लेषण किया गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक कार्य के लिए सही मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना है। इसमें सामग्री और कारीगरी के विनिर्देश भारतीय मानकों (आईएस कोड) के अनुरूप हैं।
साथ ही, छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित किया गया है। पिछले दर अनुसूची में बुनियादी निर्माण कार्यों को क्लब किया जाता था, जो एक जटिल प्रक्रिया थी। अब, अधिकतर कार्यों को बिना क्लबिंग के सीधे बीओक्यू में प्रयोग किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया सरल होगी।
नई दर अनुसूची में उपकरणों की प्रदायगी, इंस्टालेशन और संचालन के कार्यों को शामिल किया गया है, जो कि राज्य में जल संसाधन विभाग द्वारा राष्ट्रीय जल प्रबंधन प्रणाली के तहत किए जा रहे प्रोजेक्ट्स में उपयोगी होंगे।

नवीन कार्यों की स्वीकृति और निर्माण की गति
संशोधित एस.ओ.आर. 2025 से वित्तीय वर्ष 2025-26 में जल संसाधन विभाग के कार्यों को स्वीकृति मिलने में मदद मिलेगी और निर्माण कार्यों की गति में भी वृद्धि होगी। इससे ठेकेदारों को वित्तीय जोखिम से बचने में मदद मिलेगी और निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा। वर्तमान में विभाग ने राज्य में 135 स्वचलित रेनगेज, 67 आटोमेटिक वाटर लेवल रिकार्डर और 6 मौसम केंद्र स्थापित किए हैं। भविष्य में और अधिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य के जल संसाधनों की प्रबंधन क्षमता बढ़ेगी।
सेडिमेंटेशन सर्वेक्षण और जल प्रबंधन
राज्य में 24 बांधों पर सेडिमेंटेशन सर्वेक्षण का कार्य किया गया है और 14 अन्य बांधों का सर्वेक्षण प्रस्तावित है। इसके माध्यम से बांधों की जल क्षमता का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी, जो जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण होगा। विभाग ने जल संसाधन कार्यों में तकनीकी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है, जिसमें जियोटेक्निकल और जियोफिजिकल सर्वेक्षण, लिडार फोटोग्रामेट्री सर्वे और जल गुणवत्ता परीक्षण शामिल हैं। इसके माध्यम से जल प्रबंधन में मदद मिलेगी और राज्य के जलवायु स्थितियों का सही अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
