छत्तीसगढ़ में बाघ-हाथियों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

  • बाघ मित्र’ मॉडल से समाधान की कोशिश, 14 जुलाई अगली सुनवाई

Raipur @ छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई है। मंगलवार को न्यायमूर्ति रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वन्यजीवों की रक्षा नहीं की गई, तो न जंगल बचेंगे और न ही पर्यावरण का संतुलन।

वन विभाग की ओर से अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के हलफनामे के माध्यम से यह जानकारी दी गई कि 17 मार्च 2025 को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें बाघों की सुरक्षा को लेकर रणनीतिक चर्चा की गई। उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश के “बाघ मित्र” मॉडल से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ में भी यह योजना लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वन विभाग की टीम ने यूपी के बाघ अभयारण्यों और समीपवर्ती गांवों का दौरा कर योजना की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया है।

मानव-बाघ संघर्ष रोकना प्राथमिकता

हलफनामे में बताया गया कि “बाघ मित्र” योजना का उद्देश्य मानव-बाघ संघर्ष को रोकना और ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाना है। स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ‘बाघ मित्र’ के रूप में तैयार किया जाएगा, जो वन विभाग और ग्रामीणों के बीच सेतु का काम करेंगे। इससे बाघों की आवाजाही की निगरानी, ग्रामीणों को समय पर सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता मिलेगी।

बाघ की संदिग्ध मौत बनी थी जांच की वजह

गौरतलब है कि 8 नवंबर 2024 को कोरिया जिले के गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में नदी किनारे एक बाघ का शव मिला था। यह शव सोनहत-भरतपुर सीमा के पास देवशील कटवार गांव के नजदीक मिला था। शव से बाघ के नाखून, दांत और आंख जैसे अंग गायब पाए गए थे, जिससे प्रथम दृष्टया शिकार की आशंका जताई गई थी। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ज़हर की पुष्टि नहीं हुई और मौत का कारण बीमारी होना बताया गया। बिसरा रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है रोष

इस घटना पर 11 नवंबर को हुई पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि “अगर वन्यजीव नहीं बचेंगे तो जंगल नहीं बचेंगे, और अगर जंगल नहीं बचेंगे तो पर्यावरण का संतुलन खत्म हो जाएगा।” कोर्ट ने वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से 10 दिनों के भीतर व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया था।

अब कोर्ट ने इस मामले को मॉनिटरिंग श्रेणी में रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 14 जुलाई 2025 तय की है। यह देखना अहम होगा कि “बाघ मित्र” योजना और अन्य प्रयास जमीन पर कितना असर दिखाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *