स्कूटर पर माँ के साथ 96,205 किलोमीटर की यात्रा

– रायपुर पहुँचे मैसूर के कृष्ण कुमार, दिखाया माँ की सेवा का सच्चा उदाहरण


रायपुर@ तेज़ रफ्तार ज़िंदगी और भागदौड़ भरी दुनिया में जहाँ लोग अक्सर माता-पिता के लिए समय नहीं निकाल पाते, वहीं मैसूर के रहने वाले 45 वर्षीय कृष्ण कुमार ने एक अनोखी मिसाल कायम की है। वे बीते सात वर्षों से अपनी 75 वर्षीय माँ चूड़ारत्नम्मा को लेकर पूरे भारत के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर हैं – और वो भी एक साधारण पुराने स्कूटर पर ।

रायपुर पहुँचने पर जब लोगों को पता चला कि यह बेटा अपनी माँ की इच्छा पूरी करने के लिए अब तक 96,205 किलोमीटर की यात्रा कर चुका है, तो हर कोई भावुक हो गया। लोगों ने फूलमालाओं से उनका स्वागत किया और उनकी सेवा भावना को सलाम किया।
कृष्ण कुमार पहले एक कॉर्पोरेट कंपनी में अच्छे पद पर काम करते थे, लेकिन जब उनकी माँ ने एक दिन धीरे से यह कहा कि उन्होंने जीवन में कभी देश के प्रसिद्ध मंदिर नहीं देखे, तो बेटे ने ठान लिया कि वह माँ की यह इच्छा हर हाल में पूरी करेगा। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और उस स्कूटर पर निकल पड़े, जो उन्हें 21वें जन्मदिन पर उनके पिता ने गिफ्ट किया था।


यह सफर किसी आरामदायक कार या आलीशान साधनों से नहीं, बल्कि उस स्कूटर पर हो रहा है, जिसमें हर मोड़ पर माँ-बेटे का प्यार और विश्वास बैठा है। अब तक वे भारत के लगभग सभी राज्यों में जा चुके हैं। इसके अलावा नेपाल, भूटान और म्यांमार जैसे देशों में भी यात्रा कर चुके हैं। उनका लक्ष्य है माँ को उन सभी तीर्थस्थलों तक ले जाना, जिन्हें वो हमेशा से देखना चाहती थीं।
कृष्ण कुमार का कहना है, “माँ ने हमेशा हमें सब कुछ दिया, लेकिन कभी खुद के लिए कुछ नहीं माँगा। ये यात्रा मेरी ओर से उनका धन्यवाद है।” माँ चूड़ारत्नम्मा कहती हैं, “मैं बेहद खुश हूँ। हमें कोई स्वास्थ्य परेशानी नहीं है। भगवान की कृपा है और मेरे बेटे का साथ।”


इस यात्रा को न तो किसी कंपनी का प्रायोजन मिला है और न ही कोई प्रचार-प्रसार। बस एक बेटे का संकल्प है, जिसे वह पूरे प्रेम और श्रद्धा से निभा रहा है। रायपुर में उनका अनुभव भी बेहद खास रहा। यहाँ के लोगों ने उनकी कहानी सुनकर उन्हें आदरपूर्वक सम्मानित किया।
कृष्ण कुमार की यह यात्रा केवल तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संदेश भी है – कि माता-पिता को उनका सम्मान और प्रेम सिर्फ़ शब्दों से नहीं, कर्मों से दिखाया जाना चाहिए, जब वे हमारे साथ हैं।
छत्तीसगढ़ की यात्रा के बाद अब वे आंध्र प्रदेश की ओर रवाना होंगे और फिर मैसूर लौटेंगे। उनका यह सफर हर किसी को प्रेरित करता है कि श्रद्धा, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का महत्व आज भी ज़िंदा है।

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