- सरकार से नाराज़ अनियमित कर्मियों ने कहा— नहीं मिली सुनवाई, तो जुलाई से अनिश्चितकालीन आंदोलन होगा

Raipur : प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का आह्वान किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रेलवे लाइन के पास रोक लिया। इस प्रदर्शन में प्रदेश के 52 अनियमित कर्मचारियों के संघों से करीब 10,000 कर्मचारी शामिल हुए।
क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें?
अनियमित कर्मचारियों की प्रमुख मांगें नियमितीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यूनतम वेतन में वृद्धि, अंशकालीन कर्मचारियों का पूर्णकालीन करना, और आउट सोर्सिंग सिस्टम को बंद करना हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनके मुद्दों की अनदेखी की है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ा।

विरोधाभासी वादे और सरकार की अनदेखी
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भाजपा नेताओं ने विपक्ष में रहते हुए उनकी समस्याओं को हल करने का वादा किया था, लेकिन अब सत्ता में आते ही उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि मोदी सरकार के “वचनबद्ध सुशासन” में इस मुद्दे का समाधान करने का वादा था, लेकिन सरकार ने एक समिति का गठन किया, जिसमें अनियमित कर्मचारियों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में और आक्रोश फैल गया है।
सरकार की उपेक्षा से आहत कर्मचारी
प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि सरकार ने पिछले 1.5 वर्षों में अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया। इसके विपरीत, कर्मचारियों की छटनी की जा रही है, वेतन लंबित है, और संविदा वेतन में वृद्धि नहीं की जा रही है। कई विभागों में श्रम सम्मान राशि भी जारी नहीं की जा रही है।

आंदोलन की अगली रणनीति
यदि सरकार अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं करती है, तो कर्मचारी जुलाई में अनिश्चितकालीन आंदोलन की योजना बना सकते हैं। यह आंदोलन प्रदेशभर में और भी व्यापक हो सकता है।
