दिनेश यदु @ Raipur : सृष्टि सेवा संकल्प संगठन ने एक अनोखी पहल की है, जिसमें उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश गांव-गांव पहुंचाने की ठानी है। इस पहल की शुरुआत तब हुई जब उन्हें जानकारी मिली कि रायपुर के तररा गांव में जल स्तर बेहद नीचे चला गया है। गांव के तालाब सूख चुके हैं, चापाकल काम नहीं कर रहे और लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं।

वृक्षों की कमी बनी जल संकट की वजह
जब सृष्टि सेवक गांव पहुंचे तो पाया कि तररा में पेड़ों की संख्या बहुत कम हो चुकी है। गांव के सरपंच ने बताया कि पहले हाईवे से गुजरने वाले वाहन गांव से नजर नहीं आते थे, लेकिन अब पेड़ों की कमी के कारण सबकुछ साफ दिखता है। इससे साफ था कि गांव में हरियाली खत्म हो रही है और उसका सीधा असर जल स्रोतों पर पड़ा है।

टेमरी गांव बना पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण
नीमा गुप्ता ने बताया कि सृष्टि सेवकों को जानकारी मिली कि रायपुर के टेमरी गांव में हालात बिल्कुल उल्टे हैं। वहां के लोगों ने मिलकर खूब पेड़ लगाए हैं, खासकर गांव के स्कूल में। बच्चे अब पेड़ों की छांव में पढ़ना पसंद करते हैं और गांव का माहौल काफी अच्छा हो गया है।
संगठन ने तररा गांव की महिला कार्यकर्ताओं को 4 मई को टेमरी गांव ले जाकर वहां की व्यवस्था दिखाई। टेमरी की पूर्व सरपंच पदमा यादव ने उन्हें बताया कि कैसे एक बंजर पड़ी ज़मीन को बचाने के लिए गांव वालों ने मिलकर वहां पेड़ लगाए और अब वही जगह “विहान नुक्कड़” के रूप में विकसित हो चुकी है, जहाँ महिलाओं और मूक-बधिरों को रोजगार भी मिल रहा है।
साफ-सफाई, रोजगार और पर्यावरण का अनोखा मेल
विहान नुक्कड़ में शौचालय की विशेष व्यवस्था की गई है जिसमें ₹5 जमा करने पर महिलाओं को स्वच्छ पैड मिलता है और पुराने पैड को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है। इस व्यवस्था को सरकार ने भी सराहा और पुरस्कार दिया है। साथ ही वहां ई-व्हीकल चार्जिंग की सुविधा भी है।

विद्यालय बना जल संरक्षण का मॉडल
टेमरी का स्कूल जल संरक्षण में भी उदाहरण है। स्कूल में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से बारिश का पानी ज़मीन में समाहित किया जाता है। वहां मोटर सोलर एनर्जी से चलती है, जिससे बिजली की भी बचत होती है।
प्रकृति बचाओ, जीवन सहज बनाओ
सृष्टि सेवकों ने तररा गांव की महिलाओं को यह अनुभव करवाया कि यदि प्रकृति की देखभाल की जाए तो जल, हवा, छाया और रोजगार की कोई कमी नहीं रहती। वृक्ष न सिर्फ ऑक्सीजन देते हैं बल्कि वर्षा, जलस्तर और पक्षियों के जीवन के लिए भी ज़रूरी हैं।
