महादेव घाट पर खारून गंगा महा आरती को लेकर विवाद, आयोजकों का स्पष्ट बयान

विरोधों के बीच आयोजकों ने धर्म और आस्था के सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की

Raipur @ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के महादेव घाट पर आयोजित हो रही माँ खारून गंगा महा आरती को लेकर विवाद गहरा गया है। यह विवाद स्थानीय लोगों और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना द्वारा उठाए गए सवालों के बाद बढ़ा है। हालांकि, आयोजकों ने इस विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दावा किया है कि यह धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति का प्रचार है, न कि कोई अवैध कार्य।

मुख्य आयोजनकर्ता ने कहा – कोई भी विरोध हमारी आरती को नहीं रोक सकता

माँ खारून गंगा महा आरती के प्रमुख आयोजक वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “चाहे मुझे जेल भेज दिया जाए या मेरी हत्या कर दी जाए, लेकिन माँ खारून गंगा मैया की आरती बंद नहीं होगी। यह हमारी आस्था और धर्म का सवाल है, जिसे कोई नहीं रोक सकता।” उनका कहना है कि यह आयोजन पूरी तरह से धार्मिक भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य सनातन धर्म और संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना है।

दान वसूली स्वेच्छिक है, कोई दबाव नहीं : अमिताभ दुबे

समिति के वरिष्ठ सदस्य अमिताभ दुबे ने विरोध के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि दान के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल केवल स्वेच्छिक है। उन्होंने कहा, “पाटों का निर्माण केवल पूजन सामग्री को स्वच्छ रखने के लिए किया गया है। क्यूआर कोड से दान लेना पूरी तरह से स्वेच्छिक है और इसमें किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाता।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस महाआरती का विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल सनातन धर्म के प्रचार में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

भगवान की आराधना पर रोक नहीं होनी चाहिए : आचार्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री

महादेव घाट पर आरती के मुख्य पुजारी आचार्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “जो लोग माँ खारून गंगा महाआरती का विरोध कर रहे हैं, वे भगवान की आराधना का विरोध कर रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्म और आस्था किसी जाति या समुदाय की सीमाओं से परे होती है और यह आरती सभी के लिए है।” उनका कहना था कि भगवान की पूजा में किसी को भी रोकने का अधिकार नहीं है।

विरोधियों का आरोप सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण और चंदा वसूली

कुछ स्थानीय लोगों और संगठनों ने महाआरती आयोजन के लिए इस्तेमाल किए गए स्थान और संसाधनों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप था कि आयोजन स्थल पर पाटों का निर्माण और क्यूआर कोड के माध्यम से चंदा वसूला जा रहा है। विरोध करने वालों ने इसे सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण और अवैध गतिविधि करार दिया है।

आयोजकों का स्पष्टीकरण – धार्मिक भावना से प्रेरित है आयोजन

विरोध के बावजूद आयोजकों ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि यह आयोजन पूरी तरह से धार्मिक भावना से प्रेरित है और इसमें किसी प्रकार की अवैध गतिविधि शामिल नहीं है। वे इसे सनातन धर्म की सेवा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए इसे और भव्य बनाने की दिशा में कार्यरत हैं।

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